रायपुर। कलेक्टर बीजापुर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में जिले में संचालित उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पुनर्वास केंद्र बीजापुर में साक्षरता केंद्र के छठवें बैच का शुभारंभ किया गया। इस बैच में 90 असाक्षर पुनर्वासित युवाओं को बुनियादी साक्षरता और अंकज्ञान का प्रशिक्षण देकर साक्षर बनाया जाएगा।
शिक्षा से आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ते कदम-इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को शिक्षा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सक्षम करना है। साक्षरता के माध्यम से युवाओं को न केवल पढ़ने-लिखने का ज्ञान मिलेगा, बल्कि वे दैनिक जीवन और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी बेहतर ढंग से संचालित कर सकेंगे।
साक्षरता से बदली जिंदगी, मिला रोजगार का नया रास्ता-कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में कोण्डापल्ली में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से मुलाकात में एक पुनर्वासित दंपति ने बताया कि पुनर्वास केंद्र में प्राप्त साक्षरता और अंकज्ञान ने उनके जीवन में नया बदलाव लाया है। शिक्षा के बल पर वे आज सफलतापूर्वक दुकान का संचालन कर अपनी आजीविका कमा रहे हैं।
शिक्षार्थियों को वितरित की गई अध्ययन सामग्री-कार्यक्रम के दौरान शिक्षार्थियों को उल्लास प्रवेशिका, मार्गदर्शिका, अभ्यास पुस्तिका, पेन सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री प्रदान की गई। अध्ययन सामग्री प्राप्त कर पुनर्वासित युवाओं में उत्साह और नई ऊर्जा का संचार देखने को मिला।
गोंडी भाषा में समझाया शिक्षा का महत्व-इस अवसर पर जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के जिला परियोजना अधिकारी श्री कमलदास झाड़ी ने गोंडी बोली में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षार्थियों को नियमित अध्ययन और निरंतर सीखने के लिए प्रेरित किया।
साक्षरता अभियान से मजबूत हो रहा पुनर्वास का प्रयास-उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम पुनर्वासित युवाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। यह पहल उन्हें आत्मविश्वास, रोजगार के अवसर और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का मजबूत आधार प्रदान कर रही है।