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Posted On:- 01-May-2022

IAS शैलबाला ने फेसबुक पर आमार सखा जाजाबोर डॉ राकेश पाठक लिखकर दी अफेयर की जानकारी

भोपाल। 56 की उम्र में भी मध्य प्रदेश की सीनियर आईएएस शैलबाला मार्टिन के अफेयर के चर्चे देश ही नहीं दुनिया में है। इस युगल ने यह साबित कर दिया कि प्यार अगर सच्चा हो तो उम्र की दहलीज उसकी धारा का मंद नहीं कर सकती। सीनियर आईएएस शैलबाला और उनसे प्रेम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक दोनों कवि हृदय हैं। राकेश पाठक ने सोशल मीडिया के जरिए अपने प्यार के किस्से को सार्वजनिक किया तो शैलबाला भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने भी 2 अप्रैल 2022 को साहित्यिक पुट देते हुए मार्मिक पोस्ट किया। उन्होंने फेसबुक पर लिखा- 

आमार सखा जाजाबोर डॉ राकेश पाठक

अपनी सीरीज आमी एक जाजाबोर में यदा कदा अपने यात्रा संस्मरण लिखती रही हूं। लेकिन आज आपका परिचय अपनी जीवन यात्रा के साथी जाजाबोर (यायावर) से करवा रही हूं। उनका नाम है डॉक्टर राकेश पाठक। अब तक की यात्रा निपट अकेले रही और अब डॉ पाठक के साथ जीवन पथ पर आगे बढूंगी। हम करीब दो साल से सखा, साथी थे और अब जीवनसाथी होंगे। 

कबीरदास ने लिखा है न-

प्रेम न बाड़ी ऊपजे प्रेम न हाट बिकाय,
राजा पिरजा जेहि रुचे सीस देय ले जाय।

चम्बल की माटी में पैदा हुए डॉ राकेश पाठक वैसे किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं लेकिन फिर भी प्रियजनों, शुभ चिंतकों को थोड़ा बहुत बताना ठीक रहेगा। डॉ राकेश पाठक देश के प्रतिष्ठित पत्रकार, संवेदनशील कवि, लेखक और गांधीवादी कार्यकर्ता हैं। तीन दशक से लंबे पत्रकारिता के जीवन में नवभारत, नईदुनिया, नवप्रभात, प्रदेश टुडे जैसे अखबारों में वर्षों सम्पादक रहे।  सांध्य समाचार, सांध्यवार्ता स्वदेश, आचरण, लोकगाथा आदि अखबारों में महत्वपूर्ण दायित्व निभाये। अपनी बेबाक, निर्भीक लेखनी और ओजस्वी भाषणों के लिये पहचाने जाने वाले राकेश जी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में भी अहम जिम्मेदारिया निभा चुके हैं। 

डीएनएन न्यूज चैनल के एडिटर इन चीफ  और डेटलाइन इंडिया वेबसाइट के चीफ  एडिटर रहे। आजकल कर्मवीर न्यूज के प्रधान संपादक हैं। इन दिनों उनके खास शो देश के विभिन्न ऑनलाइन न्यूज चैनल पर देखे जा सकते हैं। डॉ पाठक ने भारत के माननीय राष्ट्रपति की आधिकारिक कंबोडिया, लाओस यात्रा को कवर किया था। उन्होंने कोसोवो ( यूगोस्लाविया के विघटन से बना देश) में गृह युद्ध के समय संयुक्त राष्ट्रसंघ शांति मिशन की रिपोर्टिंग की। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र संघ में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन में भी भागीदारी की थी।

डॉ पाठक की तीन पुस्तकें बसंत के पहले दिन से पहले (काव्य संग्रह) , काली चिडिय़ों के देश में (यात्रा वृत्तांत) और म.प्र. की स्वातंत्रयोत्तर हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं। शीघ्र ही चौथी पुस्तक भी आने वाली है। अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त कर चुके डॉ पाठक इंसानियत के सिपाही के रूप में भी जाने जाते हैं। कोरोना की पहली लहर में उनके मोर्चे ने विस्थापित मजदूरों की जो सेवा की थी उसे देश भर में जाना गया था।

गांधीवादी विचारधारा के लिये लडऩे, जूझने वाले योद्धा डॉ राकेश पाठक के साथ जीवन की आगे की यात्रा शुरू कर रही हूं। मैं अब इस यात्रा में आमी एक जाजाबोर नहीं आमी दुई जाजाबोर हो रही हूं। 

शैलबाला ने आगे लिखा

डॉ पाठक की प्रिय पत्नी प्रतिमा जी का ब्लड कैंसर से संघर्ष करते लगभग सात वर्ष पूर्व निधन हो गया था। परमेश्वर धाम से प्रतिमा जी की शुभेच्छाएं भी हमारे साथ होंगीं। प्यारी बेटियां सौम्या और शची अब मेरी बेटियां हैं। बेटियों ने ही पिछले दिनों पाठक परिवार में मेरा परिचय कराया। नानी जी और पूरे कुनबे ने मुझे ख़ूब आशीष दिया। 
आप सबकी शुभकामनाएं हमारा सम्बल बनेगीं ऐसी आशा है।

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