मनेंद्रगढ़।शासन की महत्वाकांक्षी मध्याह्न भोजन योजना का हाल मनेंद्रगढ़ के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में बेहाल है। बच्चों को पौष्टिक आहार देने की बात सिर्फ कागज़ों तक सीमित है, जबकि हकीकत में स्कूल के किचन में मेनू की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शासन द्वारा तय साप्ताहिक मेनू में बच्चों के लिए हर दिन अलग-अलग पौष्टिक व्यंजन दिए जाने का निर्देश है मगर हक़ीक़त यह है कि स्कूल में ज्यादातर दिनों परोसा जाता है सिर्फ चावल और दाल, वह भी बिना स्वाद और ठंडा। कुछ छात्रों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि कई बार तो खाना इतना बेस्वाद होता है कि बच्चे पूरा खाना छोड़ देते हैं। मेनू में लिखा होता है फल या अंडा, पर कई दिनों से हमें सिर्फ दाल-चावल ही मिल रहा है,ऐसा बच्चो ने कहा। आमजनो का कहना है शासन लाख योजनाएं बना ले, लेकिन अगर निगरानी कमजोर होगी तो अधिकारी और ठेकेदार मिलकर बच्चों के अधिकारों पर डाका डालते रहेंगे। बच्चे अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ रहे हैं, पर अगर बुनियादी भोजन ही नहीं मिलेगा तो उत्कृष्टता कहां से आएगी।ऐसा तंज कसा जाता है।
सूत्रों के मुताबिक स्कूल में भोजन वितरण का जिम्मा जिस समूह को सौंपा गया है, वह कई बार बिना जांच या निगरानी के भोजन देते है। न कोई गुणवत्ता जांच, न कोई रिकॉर्ड अपडेट। सवाल उठता है कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन आखिर कब तक आंख मूंदे बैठे रहेंगे।शिक्षा विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उन्हें कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है। अगर प्रशासन ने समय रहते इस लापरवाही पर सख्त कार्रवाई नहीं की तो यह योजना अपने मकसद से भटक जाएगी और बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ेगा। शासन को चाहिए कि जिला शिक्षा अधिकारी और खाद्य निरीक्षक की संयुक्त टीम बनाकर औचक निरीक्षण कर जांच कराया जाए।और दोषी पाए जाने पर भोजन प्रदाता संस्था पर कार्रवाई हो और बच्चों को निर्धारित मेनू के अनुसार पौष्टिक भोजन मिले।