Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 12-Jul-2026

​अबूझमाड़ का नया सवेरा: डोंडरीबेड़ा से कटेर की सड़क ने मिटाया दशकों का सन्नाटा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर (Bastar) अंचल में हुए एक विशिष्ट सड़क  विकास से दशकों तक कटा रहा l दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों (जैसे डोंडरबेड़ा और कटेर) को मुख्य मार्गों से जोड़कर आवागमन की बाधाओं, पलायन और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के अंधकार को मिटा रही है।
ये पक्की सड़कें न केवल दशकों का सन्नाटा तोड़ती हैं, बल्कि सुदूर इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, और बाज़ार तक पहुंच जैसे मौलिक लाभ भी पहुंचाती हैं।    गहरे जंगलों से घिरा अबूझमाड़... एक ऐसा अंचल, जिसका नाम सुनते ही कभी जेहन में दुर्गम रास्ते, कटी हुई जिंदगी और विकास की अंतहीन प्रतीक्षा की तस्वीर उभरती थी। लेकिन आज इस अबूझमाड़ की फिजा बदल रही है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत नारायणपुर जिले के अतिदुर्गम इलाके में बनी एक नई सड़क ने यहाँ के ग्रामीणों के जीवन में खुशियों का एक नया अध्याय लिख दिया है।-  ​डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक बनी 8.75 किलोमीटर लंबी यह सड़क सिर्फ डामर की पट्टी नहीं है, बल्कि दशकों से मुख्यधारा से कटे जनजातीय गांवों के लिए उम्मीद और भरोसे की एक मजबूत डोर है।

​पगडंडियों का दर्द और बारिश का वो खौफ-   ​कुछ समय पहले तक, इस इलाके के गांवों तक पहुँचने का एकमात्र जरिया संकरी और पथरीली पगडंडियां थीं। मानसून के आते ही ये रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते थे, जिससे ग्रामीण अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर थे। बच्चों को स्कूल जाने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता था।एम्बुलेंस का गाँवों तक आना नामुमकिन था। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर अस्पताल न पहुँच पाने के कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती थी। ग्रामीण अपनी कड़ी मेहनत से उगाई गई कृषि और वनोपज को हाट-बाजारों तक नहीं ले जा पाते थे, जिससे उन्हें उनके हक़ की सही कीमत नहीं मिलती थी।

​856.19 लाख रुपए की लागत से बदला भूगोल-   ​प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और 'पीएम-जनमन' योजना की ताकत से 856.19 लाख रुपये की भारी लागत के साथ इस दुर्गम चुनौती को पार किया गया। डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक की इस चमचमाती सड़क ने अब इन गांवों की किस्मत बदल दी है। ​पहली बार गाँव की चौखट तक पहुँची एम्बुलेंस और विकास।​सड़क बनने से पूरे अंचल की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर में जादुई बदलाव आया है।