Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 02-Oct-2026

छत्तीसगढ़ की पुरातात्विक धरोहरों में बढ़ेंगी पर्यटक सुविधाएं

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण और छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के बीच महत्वपूर्ण एमओयू

संरक्षित स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग, साइट म्यूजियम सहित विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं

ऐतिहासिक स्वरूप और मौलिकता को सुरक्षित रखते हुए विरासत पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

रायपुर,  छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ प्रदेश में विरासत पर्यटन को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआई), भारत सरकार और संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के मध्य बुधवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) सम्पन्न हुआ। इस समझौते के माध्यम से प्रदेश के संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं एवं अधोसंरचना का सुनियोजित विकास किया जाएगा।

समझौते के तहत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के अधिकारियों के परामर्श से संरक्षणाधीन स्मारकों एवं पुरातात्विक स्थलों के लिए पर्यटक सुविधाओं के समुचित विकास की योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन योजनाओं के माध्यम से पुरातात्विक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ पर्यटन अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया जाएगा।

पर्यटकों के लिए विकसित की जाने वाली सुविधाओं में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग और क्लॉक रूम जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ सूचना केंद्र, साइट म्यूजियम और साइनेज भी शामिल होंगे। विशेष रूप से समावेशी पर्यटन को ध्यान में रखते हुए ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे विकसित करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा लैंडस्केपिंग सहित पर्यटकों की आवश्यकता के अनुरूप अन्य अधोसंरचनाओं का भी विकास किया जा सकेगा।

’पुरातात्विक धरोहरों की मौलिकता रहेगी सर्वाेपरि’

विकास कार्यों के दौरान ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्मारकों की मौलिकता और उनके मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्तावित विकास कार्यों की डिजाइन, निर्माण सामग्री एवं संरचना इस प्रकार निर्धारित की जाएगी कि संबंधित स्मारक को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचे। सभी कार्य पुरातत्त्वीय अधिनियमों और नियमों के अनुरूप किए जाएंगे। परियोजनाओं का क्रियान्वयन भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही किया जाएगा।

’केंद्र, राज्य, सीएसआर और पीपीपी से जुटाए जा सकेंगे संसाधन’

पुरातात्विक स्थलों पर प्रस्तावित पर्यटक सुविधाओं एवं अधोसंरचना विकास के लिए संसाधन जुटाने की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। परियोजनाओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ राज्य शासन की एजेंसियों, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) तथा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से संसाधन जुटाए जा सकेंगे। विकसित सुविधाओं के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन अथवा शासन द्वारा अधिकृत एजेंसी की होगी।

’योजना एवं क्रियान्वयन समिति करेगी निगरानी’

विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने और उनके क्रियान्वयन की सतत निगरानी के लिए “योजना एवं क्रियान्वयन समिति” का गठन किया जाएगा। यह समिति परियोजनाओं की योजना तैयार करने से लेकर विकास एवं प्रबंधन तक विभिन्न चरणों की निगरानी करेगी। इससे संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।