रायपुर। कृषि को आधुनिक, जलवायु-अनुकूल और लाभदायक बनाने के लिए किसानों और वैज्ञानिकों की एक पहल है, इसका मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिक अनुसंधान (लैब) को सीधे खेतों (लैंड) तक पहुंचाना है, जिससे कृषि लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार और कलेक्टर सूरजपुर के मार्गदर्शन में जिले के सभी विकासखंडों में 05 मई से 20 मई 2026 तक संचालित विकसित कृषि संकल्प अभियान का सफलतापूर्वक आयोजन गया है। इस 12 दिवसीय विशेष अभियान के दौरान जिले की 144 ग्राम पंचायतों में कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा सह शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से उन्नत और आधुनिक कृषि तकनीकों, नवीन शासकीय योजनाओं तथा वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचाई गई।
अंतिम दिन विभिन्न विकासखंडों में शिविरों का आयोजन-अभियान के अंतिम दिन, 20 मई को जिले के विभिन्न विकासखंडों की ग्राम पंचायतों में शिविर लगाए गए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं भैयाथान के सत्यनगर एवं बरौधी, ओड़गी के खोंड एवं धरसेंडी,
सूरजपुर के सरमा एवं डूमरिया, रामानुजनगर के छिंदिया एवं भरवामुड़ा, प्रतापपुर के कोटेया एवं सोनगरा और प्रेमनगर के रघुनाथपुर एवं शिवनगर में शविरों के माध्यम से उन्नत और आधुनिक कृषि तकनीकों, नवीन शासकीय योजनाओं तथा वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी सीधे किसानों की दी।
उर्वरकों के संतुलित उपयोग और विकल्पों पर चर्चा-शिविरों में कृषि विज्ञान केन्द्र (अजिरमा, अंबिकापुर) तथा शासकीय कृषि महाविद्यालय (प्रतापपुर) के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधा संवाद कर खेती-किसानी से जुड़ी उनकी समस्याओं व जिज्ञासाओं का समाधान किया। विशेषज्ञों ने संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक अनुशंसा पर आधारित ई-उर्वरक (टोकन प्रणाली) की जानकारी दी। इसके साथ ही, डीएपी के विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक व जैविक उर्वरकों जैसे 12:32:16, 20:20:13, 10:26:26, 28:28, 16:16:16, 14:35:14, एसएसपी , हरी खाद, जैव उर्वरक और नील-हरित काई के प्रयोग पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।