Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 11-Jun-2026

पारंपरिक उपचार पद्धति के संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना मिसाल

11 वैद्य सम्मेलनों से 1600 से अधिक वैद्यों को मिला प्रशिक्षण, हीलर हर्बल गार्डन और आधुनिक उपकरणों से बढ़ी क्षमता

पारंपरिक उपचार पद्धति के संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना मिसाल

रायपुर। वैद्य सम्मेलनों का आयोजन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के ज्ञान को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक अत्यंत सशक्त माध्यम है। इन आयोजनों से अनुभवी वैद्यों के पास मौजूद स्थानीय ज्ञान का दस्तावेजीकरण होता है और छात्रों व युवा चिकित्सकों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अनूठा अवसर मिलता है l छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा राज्य की पारंपरिक उपचार पद्धतियों को संरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बोर्ड ने प्रदेशभर में 11 वैद्य सम्मेलनों का आयोजन कर पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल की है।

1600 से अधिक वैद्यों ने किया ज्ञान और अनुभव साझा-   बोर्ड द्वारा आयोजित सम्मेलनों में एक राज्य स्तरीय, छह संभाग स्तरीय और चार जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन शामिल रहे। 8 अक्टूबर 2025 को आयोजित राज्य स्तरीय वैद्य सम्मेलन में लगभग 1100 वैद्यों ने भाग लिया, जबकि अन्य सम्मेलनों में करीब 1600 वैद्य शामिल हुए। इन आयोजनों में वैद्यों को औषधीय पौधों के वैज्ञानिक एवं वानस्पतिक नामों की जानकारी दी गई, जिससे उनके पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ा जा सके। साथ ही वैद्यों ने अपने अनुभवों और उपचार पद्धतियों का आदान-प्रदान भी किया।

सिखाई गई विनाश-विहीन विदोहन तकनीक-   सम्मेलनों में वैद्यों को औषधीय पौधों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए विनाश- विहीन विदोहन तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। इससे पौधों को नुकसान पहुंचाए बिना उनका संग्रहण संभव हो सकेगा और भविष्य में भी इनका उपयोग जारी रहेगा।