Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 09-Jul-2026

जशपुर में अवैध उर्वरक विक्रय पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

बिना लाइसेंस और बिना पीओएस मशीन के उर्वरक बिक्री पर 79 बोरी उर्वरक जब्त

कालाबाजारी, जमाखोरी और नकली उर्वरकों के विरुद्ध जिलेभर में अभियान जारी

रायपुर,  खरीफ सीजन के दौरान किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जशपुर जिला प्रशासन द्वारा उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, नकली उर्वरकों की बिक्री एवं अनियमित विक्रय के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विकासखंड बगीचा में बिना लाइसेंस एवं बिना पीओएस मशीन के उर्वरक विक्रय किए जाने के मामलों में कार्रवाई करते हुए कुल 79 बोरी उर्वरक जब्त कर उनके विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। उप संचालक कृषि के मार्गदर्शन में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री लालसाय केरकेट्टा, कृषि विकास अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक श्रीमती क्रुसलीना मिंज तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की टीम ने विकासखंड बगीचा के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण अभियान चलाया। निरीक्षण के दौरान ग्राम सुलेसा में श्री मनोज जायसवाल द्वारा बिना वैध लाइसेंस के उर्वरक विक्रय किया जाना पाया गया। उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए 35 बोरी डीएपी, 10 बोरी सुपर फॉस्फेट तथा 7 बोरी यूरिया सहित कुल 52 बोरी उर्वरक जब्त कर उनके विक्रय पर रोक लगा दी गई। इसी प्रकार सन्ना स्थित किसान कृषि केंद्र में बिना पीओएस मशीन के उर्वरक विक्रय किए जाने का मामला सामने आने पर 27 बोरी डीएपी उर्वरक जब्त कर बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया। अधिकारियों ने बताया कि दोनों प्रकरणों की विस्तृत जांच के बाद संबंधित दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने सहित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले के सभी विकासखंडों में जिला स्तरीय निगरानी दल द्वारा उर्वरक विक्रय केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। कालाबाजारी, जमाखोरी, नकली उर्वरकों की बिक्री अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर विक्रय करने वालों के विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश एवं प्रचलित नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से पीओएस मशीन के माध्यम से ही उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल कृषि विभाग को दें, ताकि समय पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।