Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 14-Jul-2026

कबीरधाम को मिली शासकीय मेडिकल कॉलेज की सौगात, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

मेडिकल कॉलेज खुलना जिले के विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि - उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

एनएमसी ने 50 एमबीबीएस सीटों के साथ शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संचालन की दी अनुमति

लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, युवाओं को जिले में ही चिकित्सा शिक्षा का मिलेगा अवसर

रायपुर,  कबीरधाम जिले के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, कबीरधाम को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालित करने की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी है। यह मेडिकल कॉलेज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) से संबद्ध होगा। इस स्वीकृति के साथ कबीरधाम जिले की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है।

कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर-  उप मुख्यमंत्री एवं कबीरधाम विधायक श्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर जिलेवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना जिले के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रही है और इसके लिए लगातार केंद्र एवं राज्य स्तर पर समन्वय कर आवश्यक प्रयास किए गए।

चिकित्सा शिक्षा का सपना साकार करना और अधिक होगा आसान -    श्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। एनएमसी से मिली यह स्वीकृति केवल कबीरधाम ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के लाखों लोगों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का नया द्वार खोलेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं को अपने जिले में ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा, जिससे चिकित्सा शिक्षा का सपना साकार करना और अधिक आसान होगा। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ होने से जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा तथा स्वास्थ्य अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी। इससे गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों की बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी और लोगों को अपने जिले में ही बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।