रायपुर। सामूहिक सोलर पावर प्लांट स्थापित करना न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह निरंतर आय, सस्ती बिजली और आत्मनिर्भरता का एक बेहतरीन माध्यम है। आप सरकार के माध्यम से आवासीय समूह की सहायता से आसानी से प्लांट लगवा सकते हैं। जो इलाका कभी नक्सल प्रभावित होने के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर छूट रहा था, आज वह देश की सबसे आधुनिक हरित ऊर्जा क्रांति की अगुवाई कर रहा है। धमतरी जिले का सुदूर वनांचल गाँव ठेनही (नगरी विकासखंड) जिले का ऐसा पहला गाँव बन गया है, जहाँ सामूहिक सोलर पावर प्लांट स्थापित कर 71 परिवारों के जीवन को रोशन किया गया है। यह सफलता केवल बिजली आने की कहानी नहीं है, बल्कि यह अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है।
ग्रामीणों को भारी-भरकम बिजली बिलों से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति- ग्राम ठेनही के अधिकांश घरों की छतें पक्की नहीं बल्कि खपरैल की हैं, जिसके कारण छतों पर व्यक्तिगत सोलर पैनल लगाना संभव नहीं था। इस चुनौती का समाधान विद्युत विभाग और प्रशासन ने मिलकर निकाला। गाँव से महज 50-75 मीटर की दूरी पर उपलब्ध खाली जमीन पर 142 किलोवॉट क्षमता का एक बड़ा सामूहिक सोलर प्लांट खड़ा किया गया। वेंडरों द्वारा सब्सिडी की राशि से ही गाँव के सभी 71 परिवारों का 2-2 किलोवॉट के लिए पंजीयन किया गया। ग्रामीणों को इसके लिए जेब से एक भी पैसा नहीं देना पड़ा। घरों में कनेक्शन का काम तेजी से जारी है। जल्द ही ग्रिड कनेक्टिविटी के साथ बिजली उत्पादन शुरू होगा, जिससे ग्रामीणों को भारी-भरकम बिजली बिलों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
55 गाँवों में फैलेगा उजाला- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में यह ऐतिहासिक पहल धमतरी को हरित और सतत विकास का अग्रणी जिला बनाएगी। ठेनही की सफलता के बाद अब नगरी विकासखंड के फरसियां, रतावा, दुगली सहित करीब 25 अन्य गाँवों और पूरे जिले में ऐसे 55 चयनित गाँवों में इस मॉडल को लागू करने की कार्ययोजना तैयार है।