रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर या अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में गाजरघास (पार्थेनियम) जैसी हानिकारक खरपतवार के खिलाफ कृषि विभाग और स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा किसानों को जागरूक किया जाता है। यह खरपतवार फसल की पैदावार घटाने और त्वचा तथा श्वास संबंधी एलर्जी फैलाने का काम करती है।
गाजरघास जागरूकता एवं उन्मूलन सप्ताह- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में बीजापुर जिले में गाजरघास के दुष्प्रभावों से बचाव और इसके उन्मूलन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) द्वारा 16 से 22 अगस्त 2026 तक गाजरघास जागरूकता एवं उन्मूलन सप्ताह आयोजित किया गया। अभियान के दौरान स्कूलों से लेकर खेतों तक विद्यार्थियों, किसानों और ग्रामीणों को गाजरघास से होने वाले नुकसान और इसके सुरक्षित नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी गई।
खेतों में फसलों की उत्पादकता प्रभावित गाजरघास- गाजरघास यानी पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस तेजी से फैलने वाला हानिकारक खरपतवार है। यह खेतों में फसलों की उत्पादकता प्रभावित करने के साथ मिट्टी, पशुओं और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। एक पौधा बड़ी संख्या में बीज पैदा करता है, जिसके कारण इसका समय रहते नियंत्रण जरूरी है।
फसलों और स्वास्थ्य पर पड़ता है असर -बीजापुर जिले में गाजरघास के फैलाव से फसलों की पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसके संपर्क में आने से त्वचा संबंधी एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों और ग्रामीणों को गाजरघास की पहचान, उसके नुकसान और सुरक्षित उन्मूलन के तरीकों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी गई।