Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 03-Sep-2026

जिला अस्पताल जशपुर में गंभीर मरीजों का सफल उपचार, विशेषज्ञ सेवाओं से बची जान

सेप्टिक शॉक में 10 वर्षीय बच्ची को मिला जीवनरक्षक उपचार, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का सफल ऑपरेशन

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जिले में ही मिल रहा गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार

रायपुर,  जिला चिकित्सालय जशपुर में गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। चिकित्सकों एवं नर्सिंग टीम की तत्परता, त्वरित चिकित्सकीय निर्णय और बेहतर समन्वय से हाल ही में दो गंभीर मरीजों का सफल उपचार किया गया। सेप्टिक शॉक की गंभीर स्थिति में पहुंची 10 वर्षीय बच्ची को जीवनरक्षक उपचार देकर स्वस्थ किया गया, वहीं एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के गंभीर मामले में महिला का सफल ऑपरेशन कर संभावित जानलेवा जटिलताओं से बचाया गया।

इन सफल उपचारों से यह स्पष्ट हुआ है कि जिला चिकित्सालय में गंभीर एवं आपातकालीन मामलों के उपचार के लिए आवश्यक विशेषज्ञ सेवाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं लगातार सुदृढ़ हो रही हैं। इससे मरीजों को उपचार के लिए दूरस्थ बड़े चिकित्सा संस्थानों अथवा दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है और समय एवं आर्थिक संसाधनों की बचत हो रही है।

सेप्टिक शॉक में गंभीर हालत में पहुंची 10 वर्षीय बच्ची की बची जान

पाकड़टोली, जिला गुमला निवासी 10 वर्षीय संध्या कुमारी को 28 अगस्त 2026 को तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती एवं बेहोशी की गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय जशपुर लाया गया। अस्पताल पहुंचने के समय बच्ची का ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर काफी कम था। जांच में किडनी एवं लिवर फंक्शन में भी गंभीर असामान्यताएं पाई गईं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसकी स्थिति को सेप्टिक शॉक के रूप में चिन्हित किया गया। बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पराज प्रधान (डक् च्मकपंजतपबे) के नेतृत्व में तत्काल उपचार प्रारंभ किया गया। बच्ची को आईवी फ्लूड्स, उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक्स एवं आवश्यक सपोर्टिव उपचार दिया गया। लगातार कम रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए लगभग तीन दिनों तक आवश्यक वेसोएक्टिव एवं जीवनरक्षक सपोर्ट दिया गया। उपचार के दौरान चिकित्सकीय एवं नर्सिंग टीम द्वारा बच्ची के ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, चेतना की स्थिति सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य मानकों की लगातार निगरानी की गई। समय पर उपचार और सतत निगरानी के परिणामस्वरूप बच्ची की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। वर्तमान में बच्ची हेमोडायनामिक रूप से स्थिर है, पूरी तरह सचेत एवं ओरिएंटेड है तथा उसमें कोई डेंजर साइन नहीं है। बच्ची के उपचार में अमृता सिंह, संध्या साविता एक्का, अनुपा मिंज, वसुंधरा साय, प्रमिला भगत, रेशमा किस्पोट्टा, अमीना मिंज एवं अंकिता मिंज ने अपनी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।