रायपुर। पढ़ने-लिखने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। सरगुजा जिले में रविवार को आयोजित राज्यव्यापी महापरीक्षा अभियान में नवसाक्षरों के उत्साह और सहभागिता ने इस संदेश को साकार कर दिखाया। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के 247 परीक्षा केंद्रों में 4198 नवसाक्षर शिक्षार्थियों ने महापरीक्षा में भाग लिया। खास बात यह रही कि कई केंद्रों में सास-बहू, पति-पत्नी, देवरानी-जेठानी और वरिष्ठ नागरिकों ने एक साथ परीक्षा दी, वहीं केंद्रीय जेल अम्बिकापुर के 96 नवसाक्षर बंदी भी महापरीक्षा में शामिल हुए।
कलेक्टर श्री अजीत वसंत के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री रोमा श्रीवास्तव के नेतृत्व में आयोजित महापरीक्षा के लिए जिले में 4306 परीक्षार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध शाम 5 बजे तक 4198 शिक्षार्थियों ने परीक्षा दी। राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण रायपुर के निर्देशानुसार जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा के सुव्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण संचालन के लिए जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर सतत मॉनिटरिंग की गई।
महापरीक्षा बनी सीखने का उत्सव, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों ने भी दिखाई ललक
महापरीक्षा को लेकर नवसाक्षरों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई परीक्षा केंद्रों में एक ही परिवार के सदस्य साथ-साथ परीक्षा देने पहुंचे। सास-बहू, पति-पत्नी और देवरानी-जेठानी ने एक साथ बैठकर परीक्षा दी। दिव्यांगजनों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई। 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं ने परीक्षा देकर यह संदेश दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचीं। ग्रामीण क्षेत्रों में महापरीक्षा अभियान सीखने के उत्सव के रूप में नजर आया।