ड्रोन निगरानी, स्मार्ट मॉनिटरिंग और हरित विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल
विज्ञान, तकनीक और जनभागीदारी के समन्वय से आकार ले रहा है स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य
प्रकृति का संरक्षण: वर्तमान की आवश्यकता, भविष्य की जिम्मेदारी
रायपुर, धरती केवल हमारे रहने का स्थान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। स्वच्छ हवा, निर्मल जल, हरे-भरे वन और समृद्ध जैव विविधता ही मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार हैं। लेकिन आज जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन ने पूरी दुनिया के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विकास की दौड़ में प्रकृति की अनदेखी अंततः मानव जीवन के लिए ही खतरा बन सकती है। इसलिए आज आवश्यकता ऐसी विकास नीति की है जो समृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी सुरक्षित रखे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इसी संतुलित विकास की अवधारणा को आगे बढ़ा रही है। राज्य में पर्यावरणीय शासन को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन संरक्षण और सतत विकास की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
पर्यावरण संरक्षण में तकनीकी क्रांति: ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली- 21वीं सदी में तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि सुशासन और संसाधन संरक्षण का प्रभावी उपकरण बन चुकी है। पर्यावरणीय निगरानी के क्षेत्र में ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम इसी परिवर्तन का प्रतीक है। पहले जिन क्षेत्रों तक पहुँचना कठिन था, जहाँ प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान में समय लगता था, वहाँ अब अत्याधुनिक सेंसरों से लैस ड्रोन कुछ ही मिनटों में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
ड्रोन तकनीक के माध्यम से- ड्रोन तकनीक के माध्यम से PM2.5 एवं PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की निगरानी, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एवं नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) जैसे गैसीय प्रदूषकों का विश्लेषण, औद्योगिक चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की ऊँचाई पर निगरानी, नदियों एवं जलाशयों की जल गुणवत्ता का परीक्षण, अवैध अपशिष्ट निस्तारण की पहचान तथा प्रदूषण प्रभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों की सटीक मैपिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं। इससे प्रदूषण स्रोतों की शीघ्र पहचान, वैज्ञानिक विश्लेषण तथा त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो रही है।
स्मार्ट पर्यावरणीय शासन की दिशा में अग्रसर छत्तीसगढ़- पर्यावरणीय चुनौतियाँ लगातार बदल रही हैं। ऐसे में पारंपरिक निगरानी व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाना समय की मांग है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी दृष्टिकोण के साथ तकनीक आधारित पर्यावरणीय शासन को प्राथमिकता दी है।