Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 07-Jul-2026

अबूझमाड़ के कस्तूरमेटा में जल जीवन मिशन ने बदली जिंदगी

नदी-नालों के भरोसे रहने वाले 25 परिवारों के घर पहुंचा स्वच्छ पेयजल

सोलर आधारित टंकी से मिल रहा नियमित पानी

रायपुर,  छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास की एक नई किरण दिखाई दी है। जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कस्तूरमेटा में जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीणों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। कभी पीने के पानी के लिए नदी, नालों और पहाड़ी झरनों पर निर्भर रहने वाला यह गांव आज देश के उन चुनिंदा गांवों में शामिल हो गया है, जहां हर घर तक नल के माध्यम से सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है।

’महिलाओं को मिली मीलों के सफर और दूषित पानी से मुक्ति’-  जल जीवन मिशन की शुरुआत से पहले कस्तूरमेटा के ग्रामीणों के लिए स्वच्छ पेयजल एक बड़ी चुनौती थी। गांव की महिलाओं को हर रोज कई किलोमीटर का सफर तय कर जल स्रोतों से पानी लाना पड़ता था। इस भारी मशक्कत में उनका काफी समय और श्रम बर्बाद होता था, जिसका सीधा असर परिवार की आजीविका और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता था। इसके अलावा, नदी-नालों का दूषित पानी पीने की वजह से ग्रामीणों में हमेशा जलजनित (पानी से फैलने वाली) बीमारियों का खतरा मंडराता रहता था।  ग्रामीणों की इस बुनियादी और पुरानी समस्या के स्थायी समाधान के लिए कलेक्टर के कड़े निर्देशानुसार जल जीवन मिशन के तहत विशेष कार्ययोजना तैयार की गई। दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद प्रशासन ने यहां बुनियादी ढांचे का निर्माण किया। गांव में बिजली की अनिश्चितता को देखते हुए 10 हजार लीटर क्षमता की सोलर आधारित पानी टंकी स्थापित की गई। ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बीच लगभग 2700 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। गांव के सभी 25 परिवारों को सीधे नल कनेक्शन से जोड़ा गया, जिससे अब नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हो गई है।  ग्राम कस्तूरमेटा की महिलाओं  ने कहा कि घर-घर नल से जल पहुंचने से हमारा समय और मेहनत दोनों बच रहे हैं। अब हम बीमार भी कम पड़ रहे हैं और बचे हुए समय का उपयोग खेती-किसानी और घर के दूसरे कामों में कर पा रहे हैं।