सरगुजा में 587 लूज बोल्डर चेक डैम और 37 गैबियन संरचनाओं का निर्माण
वर्षा जल संचयन से बढ़ेगा भू-जल स्तर, किसानों को सिंचाई और ग्रामीणों को पेयजल में मिलेगी राहत
रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से संचालित ‘मोर गांव मोर पानी महाअभियान’ के तहत सरगुजा जिले में व्यापक स्तर पर जल संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से जिले के सभी सात विकासखंडों में वर्षा जल को गांवों में ही रोककर भू-जल पुनर्भरण सुनिश्चित करने के लिए 587 लूज बोल्डर चेक डैम तथा 37 गैबियन संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष कार्य अंतिम चरण में हैं, जिससे इस मानसून में वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित किया जा सके। जिले के अम्बिकापुर विकासखंड में 122, लुण्ड्रा में 107, सीतापुर में 16, बतौली में 34, मैनपाट में 136, उदयपुर में 46 तथा लखनपुर में 126 लूज बोल्डर चेक डैम स्वीकृत किए गए हैं। इन संरचनाओं का निर्माण नालों एवं जल प्रवाह वाले क्षेत्रों में किया गया है, जहां वर्षा जल को रोककर धीरे-धीरे भूमि में समाहित होने का अवसर मिलता है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि होगी और कुएं, हैंडपंप तथा बोरवेल जैसे जल स्रोत लंबे समय तक जलयुक्त बने रहेंगे।
’तेज बहाव वाले क्षेत्रों में प्रभावी साबित हो रही गैबियन संरचनाएं’- गैबियन संरचनाएं लोहे की मजबूत जाली में भरे पत्थरों से तैयार की जाती हैं, जो तेज जल प्रवाह वाले नालों में भी मजबूती से टिके रहती हैं। सामान्य लूज बोल्डर चेक डैम की तुलना में ये अधिक टिकाऊ होती हैं तथा भूमि में हल्का धंसाव होने पर भी बिना क्षतिग्रस्त हुए स्वयं को परिस्थितियों के अनुरूप समायोजित कर लेती हैं। इन संरचनाओं में वर्षा जल दो से तीन दिनों तक ठहरने से अधिक मात्रा में पानी जमीन में समाहित होता है, जिससे भू-जल पुनर्भरण तेजी से होता है और मिट्टी के कटाव पर भी प्रभावी नियंत्रण मिलता है।