Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 06-Aug-2026

प्राकृतिक बीजों से सजी राखियां बनीं आत्मनिर्भरता की नई पहचान

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ते हुए नवाचार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई राह बना रही हैं। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के विकासखण्ड पथरिया के ग्राम रोहराकला की आदर्श महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने इस वर्ष पहली बार चावल, मूंग, धनिया, काली मिर्च सहित विभिन्न प्राकृतिक बीजों का उपयोग कर आकर्षक एवं पर्यावरण-अनुकूल राखियां तैयार की हैं।

रोहराकला की स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने शुरू किया राखी निर्माण-   पहले समूह की महिलाओं के पास आय के सीमित साधन थे। बिहान योजना के माध्यम से समूह को रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड एवं बैंक लिंकेज की सुविधा मिली। विभागीय मार्गदर्शन और क्षमता विकास प्रशिक्षण से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए राखी निर्माण की नई गतिविधि शुरू की। रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए समूह की महिलाओं ने अलग-अलग डिजाइन और रंगों में हस्तनिर्मित राखियां तैयार की हैं। प्राकृतिक बीजों से तैयार इन राखियों की खासियत इनका स्थानीय, आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप है। स्थानीय बाजार में भी इन राखियों को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। 


    राखी निर्माण से प्राप्त आय महिलाओं के परिवारों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोगी बनेगी। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं घरेलू जरूरतों में आर्थिक सहायता मिलने के साथ महिलाओं में बचत, निवेश और raipur. स्वरोजगार की भावना भी मजबूत होगी। आदर्श महिला स्व-सहायता समूह की यह पहल केवल राखी निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला उद्यमिता, स्थानीय संसाधनों के उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आई है। बिहान के सहयोग से रोहराकला की महिलाएं अब अपने हुनर को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। उनका यह नवाचार गांव की अन्य महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को भी नए आजीविका अवसर तलाशने के लिए प्रेरित कर रहा है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ते हुए नवाचार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई राह बना रही हैं। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के विकासखण्ड पथरिया के ग्राम रोहराकला की आदर्श महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने इस वर्ष पहली बार चावल, मूंग, धनिया, काली मिर्च सहित विभिन्न प्राकृतिक बीजों का उपयोग कर आकर्षक एवं पर्यावरण-अनुकूल राखियां तैयार की हैं।

रोहराकला की स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने शुरू किया राखी निर्माण

    पहले समूह की महिलाओं के पास आय के सीमित साधन थे। बिहान योजना के माध्यम से समूह को रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड एवं बैंक लिंकेज की सुविधा मिली। विभागीय मार्गदर्शन और क्षमता विकास प्रशिक्षण से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए राखी निर्माण की नई गतिविधि शुरू की। रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए समूह की महिलाओं ने अलग-अलग डिजाइन और रंगों में हस्तनिर्मित राखियां तैयार की हैं। प्राकृतिक बीजों से तैयार इन राखियों की खासियत इनका स्थानीय, आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप है। स्थानीय बाजार में भी इन राखियों को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।   राखी निर्माण से प्राप्त आय महिलाओं के परिवारों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोगी बनेगी। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं घरेलू जरूरतों में आर्थिक सहायता मिलने के साथ महिलाओं में बचत, निवेश और स्वरोजगार की भावना भी मजबूत होगी। आदर्श महिला स्व-सहायता समूह की यह पहल केवल राखी निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला उद्यमिता, स्थानीय संसाधनों के उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आई है। बिहान के सहयोग से रोहराकला की महिलाएं अब अपने हुनर को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। उनका यह नवाचार गांव की अन्य महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को भी नए आजीविका अवसर तलाशने के लिए प्रेरित कर रहा है।