Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 29-Sep-2026

नगर विकास योजना से कचना, लामांडी और सड्डू को मिलेगा सुनियोजित विकास का नया स्वरूप

*भूस्वामियों को सड़क, जलापूर्ति, सीवर और बिजली जैसी सुविधाओं से युक्त सुनियोजित एवं अधिक उपयोगी अंतिम भूखंड देने का प्रस्ताव*

*किसी भी भूमिस्वामी को नहीं किया जाएगा भूमिहीन, 100 वर्गमीटर से कम मूल भूखंड वालों के लिए भी अंतिम भूखंड का प्रावधान*

*खुले क्षेत्र, नगरीय वन और सामाजिक अधोसंरचना के लिए भूमि आरक्षित, विद्यालय से लेकर स्वास्थ्य केंद्र तक विकसित होंगी सुविधाएं*

*अंतिम भूखंडों का आवंटन अभी प्रस्तावित, 10 अक्टूबर 2026 तक आमंत्रित किए गए हैं दावे एवं आपत्तियां*

रायपुर। राजधानी रायपुर के सुनियोजित विस्तार और नागरिकों को बेहतर शहरी अधोसंरचना उपलब्ध कराने की दिशा में रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ग्राम कचना, लाभांडी व सड्डू में नगर विकास योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 49 एवं 50 के प्रावधानों के अंतर्गत तैयार इस योजना का उद्देश्य क्षेत्र का व्यवस्थित विकास करते हुए भूस्वामियों को सड़क की पहुंच, जलापूर्ति, सीवर, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं से युक्त सुनियोजित अंतिम भूखंड उपलब्ध कराना है। योजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें किसी भी भूमिस्वामी को भूमिहीन नहीं किया गया है। मूल भूखंड स्वामियों को उनकी भूमि का 40 प्रतिशत हिस्सा मिश्रित भू-उपयोग के अंतर्गत अंतिम भूखंड के रूप में आवंटित करने का प्रस्ताव है। वहीं 100 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल के मूल भूखंड वाले भूमिस्वामियों के लिए भी नेबरहुड शॉपिंग क्षेत्र में अंतिम भूखंड प्रस्तावित किए गए हैं।

*खंडित भूमि के बदले मिलेगा व्यवस्थित और उपयोगी भूखंड*-नगर विकास योजना से ऐसे भूस्वामियों को विशेष लाभ होगा, जिनकी भूमि अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है अथवा मौजूदा स्वरूप में उसका समुचित विकास कठिन है। खंडित स्वामित्व वाली भूमियों को बसरा नंबर के आधार पर एकीकृत कर पूर्ण रकबे के अनुरूप एक अंतिम भूखंड का आवंटन प्रस्तावित किया गया है। इससे भूमि का व्यवस्थित उपयोग संभव होगा और भूस्वामियों को बेहतर आकार तथा नियोजित क्षेत्र में विकास का अवसर मिलेगा। योजना के अंतर्गत नियमानुसार आकार के अंतिम भूखंड उसी ग्राम में प्रस्तावित किए गए हैं, जिस ग्राम में संबंधित भूमिस्वामी के मूल भूखंड स्थित हैं। इस व्यवस्था से विकास के साथ स्थानीय भू-स्वामित्व के हितों का भी ध्यान रखा गया है।