Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 14-Oct-2026

कुरुषनार का कायकल्प: जहाँ कल तक गूंजती थीं बारूद की आहटें

आज वहाँ लिखा जा रहा 110 नौनिहालों का सुनहरा भविष्य

​सुरक्षा बल के खाली हुए शिविर में संवर रही नई पीढ़ी, DMF से खेल मैदान, AI लैब और लाइब्रेरी निर्माण का प्रस्ताव तैयार

रायपुर, छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ का नाम सुनते ही कभी बीहड़, संवेदनशीलता और सुरक्षा चुनौतियों की तस्वीर जेहन में उभरती थी। लेकिन आज वही अबूझमाड़ बदलाव की एक नई और सुखद इबारत लिख रहा है। छत्तीसगढ के नारायणपुर जिले के विकासखंड ओरछा स्थित कुरुषनार की फिजाओं में अब डर की परछाई नहीं, बल्कि बच्चों की खिलखिलाहट और पढ़ाई का नया उत्साह है। कुरुषनार का यह परिसर, जो कभी सुरक्षा बलों का एक मजबूत कैंप हुआ करता था और जहाँ से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था संचालित होती थी, आज 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत शिक्षा और उम्मीदों का जगमगाता केंद्र बन चुका है। समय के साथ जब क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया और बलों ने अगले संवेदनशील गंतव्य की ओर रुख किया, तो जिला प्रशासन ने इस खाली परिसर का ऐसा रचनात्मक उपयोग किया जिसने पूरे राज्य के सामने जनकल्याण की एक अनूठी मिसाल कायम कर दी है।

*बंदूक की छांव से 'विद्या के मंदिर' तक का सफर*

*अब वनांचल के बच्चे सीखेंगे Artificial Intelligence (AI)*    ​बंदूक की छांव से निकलकर विद्या के मंदिर में तब्दील हो चुके इस परिसर में वर्तमान में 110 मासूम बच्चे पूर्णतः सुरक्षित वातावरण में रहकर अपने सपनों को नए पंख लगा रहे हैं। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्र होने के कारण यहाँ के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित आवास हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में पूर्व सुरक्षा शिविर का आश्रम शाला के रूप में रूपांतरण होने से न केवल बच्चों को रहने के लिए एक महफ़ूज़ छत मिली, बल्कि उनके सर्वांगीण और व्यक्तित्व विकास के लिए एक अनुकूल शैक्षणिक माहौल भी तैयार हुआ है।