रायपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के नालंदा हॉल में आज छठा दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के कुल 313 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए प्रतिभावान विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं सीनेट पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में नीति आयोग के पूर्व सदस्य एवं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व महानिदेशक डॉ. विजय कुमार सारस्वत उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईटी भिलाई के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय ने की। समारोह का शुभारंभ अकादमिक शोभायात्रा के साथ हुआ। आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संस्थान की वार्षिक उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आईआईटी भिलाई छत्तीसगढ़ को प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
छत्तीसगढ़ का पहला आईटी पार्क बना नवाचार और रोजगार की नई संभावनाओं का केंद्र
निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने बताया कि आईआईटी भिलाई और छत्तीसगढ़ शासन की संयुक्त पहल से राज्य का पहला आईटी पार्क स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा सिविल लाइंस में उद्घाटित यह आईटी पार्क प्रदेश में तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप, उद्यमिता और रोजगार सृजन को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल है। संस्थान का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में विश्वस्तरीय प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान इकोसिस्टम विकसित करना है। उन्होंने बताया कि आईआईटी भिलाई में वर्तमान में 191 अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित हैं तथा संस्थान का अनुसंधान एवं विकास बजट बढ़कर 187 करोड़ रुपए हो गया है। अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को विस्तार देते हुए संस्थान ने आईएमटी नॉर्ड यूरोप, इकोल सेंट्राल डी नांत और ग्राज़ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित विदेशी संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। निदेशक ने बताया कि आईआईटी भिलाई टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की समग्र शिक्षा पहल के सहयोग से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विद्या समीक्षा केंद्र विकसित किया गया है। इस केंद्र को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 30 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ को समर्पित किया था। यह पहल शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के उपयोग और प्रभावी निगरानी की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।