Posted By:- Lukesh Dewangan
Posted On:- 25-Oct-2026

दवाएं सस्ती हों, ग्रामीणों तक पहुंचे इलाज, नकली दवाओं पर लगे रोक -राज्यपाल श्री डेका

रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि सस्ता इलाज, किफायती दवाएं और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना देश की प्रमुख चुनौतियां हैं। इनके समाधान के लिए चिकित्सकों, फार्मासिस्टों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा। स्वास्थ्य और शिक्षा को केवल कारोबार नहीं, बल्कि समाजसेवा का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने नकली दवाओं पर रोक लगाने, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर वैज्ञानिक शोध करने और छत्तीसगढ़ की वनौषधियों के पारंपरिक ज्ञान को सामने लाने पर जोर दिया। राज्यपाल श्री  डेका आज पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल टीचर्स ऑफ इंडिया (एपीटीआई) के 28वें राष्ट्रीय अधिवेशन एपिकॉन-2026 को संबोधित कर रहे थे। अधिवेशन का विषय ‘फार्मा शिक्षक आत्मनिर्भर भारत के लिए फार्मासिस्ट तैयार करने का संकल्प’ था। राज्यपाल ने कहा कि देश ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में प्रगति की है, लेकिन ग्रामीण आबादी तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना अब भी चुनौती है। दवाओं की कीमत आम आदमी की पहुंच में होनी चाहिए। चिकित्सकों को दवाएं लिखते समय मरीज की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए और जहां संभव हो, कम कीमत वाली प्रभावी दवाओं के विकल्प अपनाने चाहिए। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि चिकित्सकों और फार्मासिस्टों को गांवों तक पहुंचकर लोगों को जागरूक करना होगा। गर्भवती महिलाओं, माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों, विशेषकर बैगा समुदाय के पास औषधीय पौधों और पारंपरिक उपचार पद्धतियों से जुड़ा महत्वपूर्ण ज्ञान है। इसका वैज्ञानिक अध्ययन और दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। भारतीय चिकित्सा परंपराओं में उपलब्ध जानकारी की आधुनिक शोध के माध्यम से जांच कर उनकी उपयोगिता का आकलन करना जरूरी है। नकली दवाओं को गंभीर खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन पर संकट पैदा होता है तथा चिकित्सा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है। फार्मेसी के विद्यार्थियों, शिक्षकों और दवा उद्योग को दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट का उपयोग ज्ञान बढ़ाने के लिए करने तथा मौलिक चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों को महत्व देने की अपील की।