Posted By:- Dushyant dixit orai
Posted On:- 26-Apr-2026

सुमित प्रताप की पहल से मिली नई जिंदगी—मासूम शिवम की बहन को इंसानियत ने दिया सहारा

प्रतापगढ़/कानपुर। कभी-कभी एक छोटी सी मदद किसी की पूरी जिंदगी बदल देती है। ऐसा ही एक भावुक मामला सामने आया है, जहां 10 साल का मासूम शिवम जायसवाल अपनी बीमार बहन और लाचार मां के लिए दर-दर मदद की गुहार लगाता नजर आया—और फिर इंसानियत ने उसका हाथ थाम लिया। प्रतापगढ़ जिले के एक गांव का रहने वाला शिवम बचपन से ही संघर्षों से जूझ रहा है। जब वह सिर्फ दो साल का था, तभी उसके पिता का निधन हो गया। मां लकवे की शिकार हैं और घर की हालत बेहद खराब। इसी बीच उसकी बहन सोनी जायसवाल को दिल में छेद जैसी गंभीर बीमारी हो गई। परिवार के पास न पैसे थे, न साधन—और कई अस्पतालों ने भर्ती करने से भी मना कर दिया। मासूम शिवम हर दरवाजे पर मदद की गुहार लगाता रहा। तभी “बानर सेना” के कुछ युवाओं ने आगे आकर उसे प्रयागराज के एक अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन वहां भी डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और बड़े शहर ले जाने की सलाह दी।हालात और भी मुश्किल हो गए, लेकिन तभी “इंसानियत ग्रुप” उम्मीद की किरण बनकर सामने आया। महज कुछ ही मिनटों में ग्रुप ने फ्री एंबुलेंस की व्यवस्था कर शिवम और उसकी बहन को कानपुर के कार्डियोलॉजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डायरेक्टर सुमित प्रताप सिंह और उनकी टीम ने तुरंत भर्ती कराया। डॉक्टरों ने हालत नाजुक बताते हुए इलाज को भगवान भरोसे बताया, लेकिन प्रयास जारी रहे।इधर “बानर सेना” और “इंसानियत ग्रुप” ने मिलकर देशभर से आर्थिक मदद जुटाने का अभियान शुरू किया। ग्रुप के सदस्य शिव वर्मा अपनी नौकरी छोड़कर बच्चे के साथ अस्पताल में रहे, घर से खाना लाकर खिलाया। वहीं कानपुर के मुन्ना चौहान ने रहने-खाने की व्यवस्था कराई, कपड़े दिलवाए और बच्चे की देखभाल की।इतना ही नहीं, जब शिवम ने एक मोबाइल फोन की इच्छा जताई, तो ग्रुप के लोगों ने उसे नया फोन भी दिला दिया, जिससे वह अपने परिवार से जुड़ा रह सके। ईश्वर की कृपा और लोगों की सच्ची सेवा का ही परिणाम है कि जिस बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी, वह अब लगभग 70% स्वस्थ हो चुकी है और इलाज जारी है। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस इंसानियत की है जो आज भी जिंदा है।संदेश साफ है—मददगार बनना है तो “इंसानियत ग्रुप” जैसा बनें।